रेस्तरां मे काँफी पीते हुए कमलेश ने धीमे से प्रेम को बताया , देखो, उधर कोने वाली कुर्सी पर बैठा वह आदमी बडी देर से मुझे घूर रहा है।
प्रेम: तो घूरने दो ना । प्रेम लापरवाही से बोला ।
कमलेश: मै उसे जानता हँ, कबाडी है और हमेशा बेकार की चीजों मे दिलचस्पी लेता है।